"मेरे महबूब के नजरों की शरारत देखो..!
ख्वाहिशे-इश्क़-ए-दुनिया की तिजारत देखो..!
साथ चलता भी है और फासला भी है रखता,
हाय मर जावा! ये अंदाजे-मुहब्बत देखो..!!१!!
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
लाल रुखसार हुआ है कि ख़ुदा खैर करे..!
इश्क़ लगता है जुआ है कि ख़ुदा खैर करे..!
मैं कही पिघल न जाऊ यू बरफ के माफ़िक,
उसने हाथों को छुआ है कि ख़ुदा खैर करे..!!२!!
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
तुझमे घुल जाऊं तो जीने की जरुरत न हो..!
नाम बिन तेरा लिए रब की इबादत न हो..!
फासला है तो क्या, हो साथ तो चलते ही तुम,
जिस्म की भूख लिए दिल की मोहब्बत न हो..!!३!!
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
यूं तो कमतर नही खुद में कोई मेला हूँ मैं..!
और बिन तेरे, तिजारत का झमेला हूँ मैं..!
गैरमौजूदगी में कुछ न गलत कर बैठूँ..
आ भी जाओ कि तुम्हारे बिन अकेला हूँ मैं..!!४!!
ख्वाहिशे-इश्क़-ए-दुनिया की तिजारत देखो..!
साथ चलता भी है और फासला भी है रखता,
हाय मर जावा! ये अंदाजे-मुहब्बत देखो..!!१!!
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
लाल रुखसार हुआ है कि ख़ुदा खैर करे..!
इश्क़ लगता है जुआ है कि ख़ुदा खैर करे..!
मैं कही पिघल न जाऊ यू बरफ के माफ़िक,
उसने हाथों को छुआ है कि ख़ुदा खैर करे..!!२!!
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
तुझमे घुल जाऊं तो जीने की जरुरत न हो..!
नाम बिन तेरा लिए रब की इबादत न हो..!
फासला है तो क्या, हो साथ तो चलते ही तुम,
जिस्म की भूख लिए दिल की मोहब्बत न हो..!!३!!
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
यूं तो कमतर नही खुद में कोई मेला हूँ मैं..!
और बिन तेरे, तिजारत का झमेला हूँ मैं..!
गैरमौजूदगी में कुछ न गलत कर बैठूँ..
आ भी जाओ कि तुम्हारे बिन अकेला हूँ मैं..!!४!!
No comments:
Post a Comment