🙏🙏गीत🙏🙏
"ख़ुदा की दी हुई नेमत का ऐतबार हो तुम..।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।
अजीज दिल की कशिश प्यार की ये जादूगरी..
इन खुशनुमा से ख्यालों से अजनवी था मैं..
जो बेखबर था हाल-ए-दिल से, आदमी था मैं..।
मगर ये जिससे हुआ दिल यूँ बेकरार, हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।१।।
इस आईने में खड़ी मुझमें तू नजर आए..
हर एक पल मेरे महबूब सोचती हूँ तुम्हें..
मगर ये कैसे कहूँ कितना चाहती हूँ तुम्हें..
मेरे सनम मेरी मुद्दत का इंतजार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।२।।
ये स्याह रात, सितारें, ये खुशनुमा सा सफर..
दिखे जो चाँद तो सूरत तेरी नजर आए..
तेरे ख़याल से अब दूर हैम किधर जाए..
मेरी हो इश्क़ तुम्ही चैन हो, करार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।३।।
तेरे वजूद से होता है रौशनी का गुमाँ..
तेरे बगैर अधूरी है जिंदगी मेरी..
घटा-ए-इश्क़ बुझा दे ये तिश्नगी मेरी..
मेरी हो नूर-ए-हकीकत मेरा श्रृंगार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।४।।
मेरे धड़कते हुए दिल से आरजू निकले..
मेरे थके से सफर को तुम्हारे पाँव मिले..
कुछ औं मिले न मिले, जुल्फों की ये छाँव मिले..
मेरे अकेले कटे वक़्त की ग़ुबार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।५।।
"ख़ुदा की दी हुई नेमत का ऐतबार हो तुम..।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।
✍️कुमार आशू
गोरखपुर
"ख़ुदा की दी हुई नेमत का ऐतबार हो तुम..।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।
अजीज दिल की कशिश प्यार की ये जादूगरी..
इन खुशनुमा से ख्यालों से अजनवी था मैं..
जो बेखबर था हाल-ए-दिल से, आदमी था मैं..।
मगर ये जिससे हुआ दिल यूँ बेकरार, हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।१।।
इस आईने में खड़ी मुझमें तू नजर आए..
हर एक पल मेरे महबूब सोचती हूँ तुम्हें..
मगर ये कैसे कहूँ कितना चाहती हूँ तुम्हें..
मेरे सनम मेरी मुद्दत का इंतजार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।२।।
ये स्याह रात, सितारें, ये खुशनुमा सा सफर..
दिखे जो चाँद तो सूरत तेरी नजर आए..
तेरे ख़याल से अब दूर हैम किधर जाए..
मेरी हो इश्क़ तुम्ही चैन हो, करार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।३।।
तेरे वजूद से होता है रौशनी का गुमाँ..
तेरे बगैर अधूरी है जिंदगी मेरी..
घटा-ए-इश्क़ बुझा दे ये तिश्नगी मेरी..
मेरी हो नूर-ए-हकीकत मेरा श्रृंगार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।४।।
मेरे धड़कते हुए दिल से आरजू निकले..
मेरे थके से सफर को तुम्हारे पाँव मिले..
कुछ औं मिले न मिले, जुल्फों की ये छाँव मिले..
मेरे अकेले कटे वक़्त की ग़ुबार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।५।।
"ख़ुदा की दी हुई नेमत का ऐतबार हो तुम..।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।
✍️कुमार आशू
गोरखपुर
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