Sunday, December 9, 2018

             🙏🙏गीत🙏🙏

"ख़ुदा की दी हुई नेमत का ऐतबार हो तुम..।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।

अजीज दिल की कशिश प्यार की ये जादूगरी..
इन खुशनुमा से ख्यालों से अजनवी था मैं..
जो बेखबर था हाल-ए-दिल से, आदमी था मैं..।
मगर ये जिससे हुआ दिल यूँ बेकरार, हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।१।।

इस आईने में खड़ी मुझमें तू नजर आए..
हर एक पल मेरे महबूब सोचती हूँ तुम्हें..
मगर ये कैसे कहूँ कितना चाहती हूँ तुम्हें..
मेरे सनम मेरी मुद्दत का इंतजार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।२।।

ये स्याह रात, सितारें, ये खुशनुमा सा सफर..
दिखे जो चाँद तो सूरत तेरी नजर आए..
तेरे ख़याल से अब दूर हैम किधर जाए..
मेरी हो इश्क़ तुम्ही चैन हो, करार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।३।।

तेरे वजूद से होता है रौशनी का गुमाँ..
तेरे बगैर अधूरी है जिंदगी मेरी..
घटा-ए-इश्क़ बुझा दे ये तिश्नगी मेरी..
मेरी हो नूर-ए-हकीकत मेरा श्रृंगार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।४।।

मेरे धड़कते हुए दिल से आरजू निकले..
मेरे थके से सफर को तुम्हारे पाँव मिले..
कुछ औं मिले न मिले, जुल्फों की ये छाँव मिले..
मेरे अकेले कटे वक़्त की ग़ुबार हो तुम..।।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।५।।

"ख़ुदा की दी हुई नेमत का ऐतबार हो तुम..।
मेरी वफ़ा हो मेरी जिंदगी हो प्यार हो तुम..।।

✍️कुमार आशू
     गोरखपुर

Thursday, December 6, 2018

कुमार आशू की कविताएं

"प्रियतमें! मै प्यार तुमसे मागता हूँ ।।

जब कभी मै व्यग्र था यू वेदना के तीब्र ज्वर से,
जब हुआ अभिशप्त जग नियमावली के तीक्ष्ण शर से,
उस अँधेंरे पाथ पर प्रिय! दीप तब तुमने जलाया,
नाव तब तुमने निकाली निर्दयी जग के भवर से,
घाव पर तब लेप मेरे स्नेह का तुमने लगाया, 
प्रिय! उसी क्षण का पुन: अधिकार तुमसे माँगता हूँ ।
प्रियतमे!..........…………………………………!!

पीर मेरी हर सके दुर्जेय वह मुस्कान दे दे,
गा सकू अपने लरजते होठ से वह गान दे दे,  
और कुछ ओ मदनिके! तुमसे न मेरी लालसा है,
मात्र मेरे स्वप्न आँसू प्रिति को सम्मान दे दे ।
जी सकूँगा शीश रखकर री! तुम्हारे अंक मे मै,
मै यही केवल यही उपहार तुमसे माँगता हूँ ।
प्रियतमे!.............………………………!!"

ये न तय है कब तलक तेरा मेरा ये साथ होगा,
कब तलक इक दुसरे के हाथ मे ये हाथ होगा,
कब ये जग अपने प्रणय को वासना का नाम देदे,
संकटों का कब घिरे बादल न कोई पाथ होगा,
उस विकट क्षण मे जहा छाया न देगी साथ तेरा,
मै तेरे विश्वास का प्रतिकार तुमसे मागता हूँ ।
प्रियतमें!................……....………………!!"

--🙏कुमार आशू ✍️ से