Sunday, May 12, 2019

एक गीत माँ को समर्पित

✍️ मातृ दिवस : एक भावना गीत ✍️

विश्व के सब कोश देखे, खोज आये व्याकरण सब,
शब्द पर मिल न सका जो कर सके तुमको बयाँ माँ..?

गर्भ में नौ मास रख मेरा सृजन तुमने किया था,
दुग्ध कर निज रक्त का तुमने मुझे जीवन दिया था,
थपकियाँ देकर सुलाती थी निशा भर जाग कर तुम,
हो विकल उठती थी पल भर देखती थी गर जो गुमसुम,
नोच लेना, काट लेना, मारना आदत थी मेरी,
किंतु तुमने सब भुलाकर प्यार से चूमा दुलारा।
कुछ मिला खाने को तुमको तो मुझे पहले खिलाया,
सो गई गीली तरफ तुम मुझकों सूखे में सुलाया,
दर्द करती थी भुजाएं किन्तु कुछ कहती न थी तुम,
कि कहीं मैं नींद से यूं हड़बड़ाकर उठ न जाऊँ,
आज भी है याद बचपन का वो हर इक वाकया माँ..!!
विश्व के सब ................................................!!

आज भी संसार से जब खिन्न होता मन हमारा,
जब मेरे अपने ही हमसे कर रहे होते किनारा,
जब लगा कि मैं ही हूँ जग में सभी से दीन दुखिया,
तब मेरी माँ की अचरियाँ ही बनी मेरा सहारा,
आज भी मुझको मेरी माँ राजकुँवर बोलती है,
बिन पिए जल व्रत कई मेरे लिए वो रख रही है
आज भी मिलती है उसकी गोद मे ही नींद मीठी,
आज भी जब चोट लगती है तो 'माँ' आवाज आती,
माँ हो सिरहाने तो अपने दर्द सारे भूल जाता,
सत्य, माँ से बढ़ जगत में दूसरा मरहम नही है,
तो कहो! मैं किस तरह तुमको समेटू एक दिन में,
जबकि मेरे रक्त के हर बूद पर है ऋण तुम्हारा,
विश्व के उपलब्धियों की प्राप्ति की इच्छा नही है,
चाहता हूँ बस बुढ़ापे में बनूँ तेरा सहारा..!
और मैं पूरी करूँ हर इक तुम्हारी कामना माँ..!!
विश्व के सब ........................................ !!

🙏 'कुमार आशू'

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